हम चुप रहेंगे (25 अप्रैल 2022)

मुस्कान …

अपने डेल्टा जी की आदत है। हमेशा मुस्कुराते रहना। उन्होंने 118 किलोमीटर की यात्रा में बाकी सभी के चेहरों पर भी मुस्कान ला दी। बिल्वेश्वर महादेव मंदिर की घटना है। 7 जिलो के मुखिया, अल्फा जी, उम्मीद जी और अपने कप्तान, अपनी-अपनी चरण- पादुका उतारने में लगे थे। तभी मंदिर के अंदर से मंत्रोच्चार सुनाई देने लगा। सभी एक-दूसरे की तरफ देखने लगे। सभी तो बाहर है। फिर अंदर कौन घुस गया। जो पूजा शुरू हो गई। जब सभी अंदर पहुंचे तो अपने डेल्टा जी बाहर निकलते दिखे। यह देखकर सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। इस मुस्कान को वहां मौजूद बाकी सभी ने देखा। मगर कोई कुछ नहीं बोला। सभी चुप रहे, तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

नाराजगी …

यह घटना भी उसी 118 किलोमीटर की यात्रा से जुड़ी है। जिसको लेकर साथ गये मातहतों में नाराजगी के स्वर है। पूजन के बाद भोजन का कार्यक्रम था। अभी तक की परंपरा यही रही है। सभी एक साथ पंगत में बैठकर भोजन करते थे। मगर इस बार उल्टा हो गया। 7 जिलो के मुखिया, अल्फा, डेल्टा, उम्मीद जी और कप्तान के लिए अलग व्यवस्था थी। बाकी सभी को पंगत स्टाइल में भोजन करना पड़ा। जिसको लेकर मातहतों में नाराजगी है। मगर चुप है, तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

जलवा …

जलवा हमेशा ऐसा होना चाहिये। जैसे अपनी घमंडी मैडम का। जिन्होंने अपने खिलाफ लगाये प्रश्न को वापस लेने पर मजबूर कर दिया। प्रश्न लगाने वाले अपने कमलप्रेमी बडबोले नेताजी थे। कुछ महीने पहले अपनी घमंडी मैडम से मिलने गये थे। तब उनको मिलने का टाइम बताकर टरका दिया था। नतीजा बडबोले नेताजी ने राजधानी में प्रश्न ठोक दिया था। आचरण संहिता का हवाला देकर। मगर अब कमलप्रेमी बोल रहे है। मामीश्री के निर्देश के बाद, बडबोले नेताजी ने अपना प्रश्न वापस ले लिया है। कमलप्रेमियों में तो यही चर्चा है। सच- झूठ का फैसला हमारे पाठकगण खुद कर ले? क्योंकि हमको तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

फाइल …

खत का मजमून भाप लेते है/ लिफाफा देखकर। यह आदत अपने उम्मीद जी की है। जिनको लेकर यह बात मंदिर के गलियारों में सुनाई दे रही है। इशारा अपने फूलपेंटधारी की तरफ है। उन्होंने एक फाइल तैयार की थी। जिसमें मंदिर में होने वाले निर्माण कार्य आदि को लेकर प्लान बनाया था। इसमें शिवाजी भवन के कुछ बदनाम चेहरों को भी जोड़ लिया। फाइल पर मोहर लगवाने के लिए अपने उम्मीद जी के पास भेजी। उम्मीद जी फाइल देखकर सारा खेल समझ गये। उन्होंने फाइल को अटका दिया। अब फूलपेंटधारी कह रहे है। उम्मीद जी की रवानगी के बाद ही मोहर लगेंगी। जिसको लेकर मंदिर में चर्चा है कि फूलपेंटधारी मूंगेरीलाल का हसीन सपना देख रहे है। अपने उम्मीद जी अभी कहीं नहीं जा रहे है। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

शिकंजा …

सूचना का अधिकार। इस कानून का फायदा उठाकर, अपनी जेब गर्म करने वालो पर नकेल डालने की तैयारी हो रही है। कोठी के गलियारों में यह चर्चा है। इस नियम को कई खबरचियों ने अपनी आय का धंधा बना लिया है। जिसके चलते अंदर ही अंदर विभागों से जानकारी एकत्रित की जा रही है। जिसके ज्यादा आवेदन मिलेंगे, उस पर जल्दी ही कानून का शिकंजा होगा। प्रशासन के इस कदम को लेकर हम अपनी तरफ से अग्रिम बधाई देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

धोबी- पछाड़ …

कुश्ती में एक दाव होता है। धोबी- पछाड़ दाव। जिसका मतलब चारों कोने चित होता है। इन दिनों कमलप्रेमी इस दाव की खूब चर्चा कर रहे है। जिसमें इशारा अपने विकास पुरूष और आराधना की तरफ है। मामला बैंक के चुनाव से जुड़ा है। जिसको लेकर सामाजिक समरसता वाले फूलपेंटधारी ने बैठक ली थी। निर्देश दिये थे। चुनाव जीतना है। साम-दाम-दंड-भेद से। इस चक्कर में 2 कमलप्रेमी प्रत्याशियों को बैठाने के लिए पहलवान पर भी दबाव बनाया। अपने पहलवान ने साफ इंकार कर दिया। नतीजा… चुनाव परिणाम आने पर फूलपेंटधारी और विकास पुरूष को धोबी- पछाड़ दाव का सामना करना पडा। इधर अंदरखाने की खबर है कि इस पूरे मामले को लेकर उच्च स्तर तक शिकायत हुई है। अब देखना यह है कि शिकायत का क्या परिणाम निकलता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

नहीं निकले …

स्मार्ट भवन के गलियारों में इन दिनों … नहीं निकले… नहीं निकले की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। जब इसके पीछे की वजह खोजी गई। तब जाकर… नहीं निकले… की पूरी कहानी समझ में आई। आखिर किसके लिए यह बोला जा रहा था… नहीं निकले। इशारा आगजनी की घटना और अपने पपेट जी की तरफ है। बुधवार की शाम को आगजनी हुई थी। जिसके बाद सभी को उम्मीद थी कि अपने पपेट जी अज्ञातवास से निकलकर सामने आयेंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ। अपने पपेट जी शहर में मौजूद रहकर भी अज्ञातवास से बाहर नहीं आये। अब इसके पीछे क्या कारण रहा। इसको लेकर सभी चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

मुसीबत …

अपने पपेट जी की मुसीबते कम ही नहीं हो रही है। ऐसी चर्चा शिवाजी भवन में है। आगजनी की घटना को भी मुसीबत के रूप में देखा जा रहा है। कारण… स्वच्छता की टीम का आगमन इसी सप्ताह होना है। जो कि कचरा- प्रबंधन को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। इधर आगमन से पहले ही आग लग गई है। ऐसे में बिन बुलाये आई इस मुसीबत से अपने पपेट जी कैसे निपटेंगे? इसको लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। शिवाजी भवन वाले अब केवल महाकाल पर भरोसा करके चुप है। तो हम भी बाबा पर भरोसा रखकर, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

तैयारी …

मिशन-2023 को लेकर अपने चरणलाल जी ने तैयारी शुरू कर दी है। मतदाताओं से जीवंत संपर्क के लिए एक नया मकान खरीदा है। अपनी विधानसभा के नगर पंचायत क्षेत्र में। जहां पर वह उस क्षेत्र की जनता के लिए उपलब्ध रहेंगे। हालांकि 2023 अभी दूर है। लेकिन देखना यह है कि नया मकान 2023 के लिए कितना शुभ साबित होता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

चलते-चलते …

शक संवत और विक्रम संवत को लेकर 2 दिवसीय आयोजन में अपने विकास पुरूष के प्रस्तुतिकरण पर सवाल खड़े हो रहे है। उनकी दलीलों में दर्शकों को दम नजर नहीं आया है। जिसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मगर हमको तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

– प्रशांत अंजाना

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