हम चुप रहेंगे ( 2 मई 2022)

तस्वीर …

कमलप्रेमी इन दिनों एक तस्वीर आपस में एक-दूसरे को दिखा रहे है। इसके साथ ही बाबा तुलसीदास की चौपाई को याद कर रहे है। चौपाई जगप्रसिद्ध है। भय बिन प्रीत ना होये गुसांई। तस्वीर अपने विकास पुरूष की है। जिसमें विकास पुरूष दंडवत मुद्रा में प्रणाम करते नजर आ रहे है। उनके समीप अपने पहलवान खड़े है। जो कि इस मुद्रा में विकास पुरूष को देखकर मुस्कुरा रहे है। आज तक अपने विकास पुरूष को ऐसी मुद्रा में प्रणाम करते कभी भी- किसी भी कमलप्रेमी ने नहीं देखा। तभी तो तस्वीर को देखकर कमलप्रेमी बाबा तुलसी को याद कर रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।

बुरे दिन …

वैसे तो कमलप्रेमी और फूलपेंटधारी हमेशा अच्छे दिन का राग अलापते है। लेकिन इन दिनों ऋषि नगर क्षेत्र के निवासी एक फूलपेंटधारी के बुरे दिन चल रहे है। तभी तो बैंक ने सूचना अखबार में प्रकाशित करवा दी। 70 पेटी ऋण का मामला है। कल तक इन फूलपेंटधारी का अपना जलवा था। प्रशासन के अधिकारी इनके घर जाकर हाजिरी देते थे। मगर उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत हुई। नतीजा ट्रस्ट से रवानगी हो गई। जिसके बाद वसूली को लेकर संपत्ति कुर्की की सूचना जारी हो गई। अभी एक बैंक से और सूचना जारी होनी है। तभी तो कमलप्रेमी बोल रहे है। आदमी का वक्त बुरा हो तो ऊंट पर बैठे इंसान को कुत्ता काट लेता है। फूलपेंटधारी का वक्त बुरा चल रहा है। अब देखना यह है कि फूलपेंटधारी अपने बुरे दिनों को कैसे और कब तक अच्छे दिनों में बदलते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हंै।

मुसीबत ….

स्वच्छता का फीड बैक मुसीबत बन गया है। अंतिम दिन भी गुजर गया है। मगर आंकड़ा लगभग 68 हजारी ही हुआ है। हालांकि फीड बैक के लिए प्रोफेशनल की मदद भी ली गई। प्रति एसएमएस डेढ़ रूपये में सौदा तय हुआ। 3 पेटी एसएमएस करने का लक्ष्य दिया गया। जिसका भुगतान साढ़े 4 पेटी करना था। मगर दिल्ली वालो ने इस बार हाथ ऊंचे कर दिये। नतीजा 2 विशेष दूत दिल्ली भी गये। सेटिंग करने। मगर बात नहीं बनी। इधर यह भी चर्चा है कि सुरक्षा चैलेंज को लेकर 2 सदस्यीय टीम आई थी। जिन्होंने उपकरणों की जांच की। जिसके बदले 2 पेटी भुगतान किया गया। ऐसी चर्चा शिवाजी भवन के गलियारों में सुनाई दे रही है। देखना यह है कि अपने पपेट जी इस मुसीबत से कैसे निपटते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

सलाह …

अपने पहलवान की सबसे अच्छ आदत है। साफ बोलना- मस्त रहना। जैसे उन्होंने शुक्रवार को बोला। शिवाजी भवन के जहर कांड पर। ठेकेदार मिलने गये थे। पहले तो उन्होंने ऐसा कदम उठाने वाले पर घोर आपत्ति जताई। नाराजगी जाहिर करी। फिर ठेकेदारों ने अपने पपेट जी की कार्यप्रणाली उनको बताई। व्यवहार भी बताया। तब पहलवान ने अपने खास शार्गिद को कहा। जो कि ठेकेदारों की अगुवाई कर रहे थे। पहलवान ने कहा कि … वह उस व्यक्ति का नाम बतायेंगे। जहां पर जाकर चुपचाप शिकायत करनी है। उसके बाद ही पपेट जी पर अंकुश लगेगा। अब देखना यह है कि पहलवान की सलाह पर उनके खास शार्गिद कब जाकर शिकायत करते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

भला …

आखिरकार अपने उम्मीद जी ने भला करने की अपनी पुरानी आदत को सक्रिय कर लिया है। तभी तो उन्होंने उस विभाग पर नकेल कसी है। जिस पर हाथ डालने से हर कोई बचता है। यह वह विभाग है। जहां पर सबकुछ मिलता है, बस दवाओं को छोडक़र। क्योंकि दवा में अच्छा- खासा कमीशन होता है। जिसकी लालच में, धरती पर भगवान का दर्जा रखने वाले इंसान, अपनी इंसानियत भूल जाते है। उम्मीद जी ने इन्हीं भगवानों पर नकेल कसी है। लेकिन आम जनता का भला तभी होगा, जब यह सभी भगवान कमीशन वाली दवा लिखना छोड़ेंगे। क्योंकि वेतन रोकने/ काटने से इनको कोई फर्क नहीं पड़ता है। देखना यह है कि अपने उम्मीद जी इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

गुहार …

अपने 7 जिलो के मुखिया से यह गुहार है। आम जनता की तरफ से। वह अपना मौन व्रत तोड़े। ताकि शहर का भला हो सके। मामला तरणताल से जुड़ा है। जो पिछले 2 साल कोरोना के कारण बंद था। उसके बाद नया बनाने के चक्कर में बंद कर दिया गया। निविदा भी हो गई है। 5 महीने हो गये है। लेकिन आज तक वर्क आर्डर नहीं निकला है। अगर अपने 7 जिलो के मुखिया, अपनी शक्तियों का प्रयोग करके, जनहित में मौन व्रत तोड़ दे। तो शायद अगले साल तक शहरवासियों को इसका लाभ मिल जाये। वरना, इसका भी हश्र बाकी निर्माण कार्यो जैसा ही होगा। तभी तो 7 जिलो के मुखिया के लिए यह अशआर शिवाजी भवन में सुनाई दे रहा है। कुछ ना कहने से भी छिन जाता है एजाजे-सुखन/ जुल्म सहने से भी जालिम की मदद होती है। उम्मीद है कि 7 जिलो के मुखिया आम जनता की गुहार पर ध्यान देंगे। तब तक अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

बाथटब …

एक तरफ आमजनता के लिए स्वीमिंग पुल निर्माण में बाधा आ रही है। वहीं दूसरी तरफ एक अधिकारी के बंगले पर साढ़े 8 पेटी खर्च करके बाथटब लगवाया गया है। जिसमें अधिकारी इस भीषण गर्मी में भरपूर मजा लेते है। स्मार्ट भवन के गलियारों में तो यही फुसफुसाहट सुनाई दे रही है। एक इंदौरी ठेकेदार की मेहरबानी से यह बाथटब लगा है। जब इसको लेकर खोजबीन की गई तो कोई भी उस अधिकारी का नाम बताने को तैयार नहीं है। बस … दबी जुबान में यह जरूर बोल रहे है कि … इतना मंहगा बाथटब, अपने 7 जिलो के मुखिया, अल्फा जी, डेल्टा जी, उम्मीद जी और अपने कप्तान के पास भी नहीं है। अब हमारे समझदार पाठकगण खुद अपने विवेक से फैसला कर ले? कौन है वह अधिकारी ? क्योंकि हमको तो अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

जासूस …

मंदिर के गलियारों में एक जासूस की खोज हो रही है। हम अपनी भाषा में बोले तो घर के भेदी की खोज हो रही है। खोज करने वाले हम नहीं, बल्कि मंदिर में सेवा देने वाले ही है। जो उस जासूस को खोज रहे है। जिसका काम केवल यह है कि … अपने फूलपेंटधारी के खिलाफ कौन क्या बोल रहा है… कौन साजिश कर रहा है। इसकी जानकारी उन तक पहुंचाना है। यह खोजबीन तेजी से चल रही है। चर्चा पर अगर यकीन करे तो इस जासूस को मानव- प्रबंधन में विशेष योग्यता हासिल है। इसीलिए अपने फूलपेंटधारी ने एजेंसी में विशेष तौर पर इस पद का सृजन करवाया है। जबकि ऐसा कोई पद अभी तक नहीं था। फिर अपनी जासूस की नियुक्ति करवा दी। नतीजा अब उनसे मानव प्रबंधन का काम छोडक़र, जासूसी का काम लिया जा रहा है। मंदिर के गलियारों में तो यही चर्चा है। जिन्होंने इस जासूस की पहचान कर ली है। अब वह जासूस के सामने चुप ही रहते है। तो हम भी उनकी तर्ज पर अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

चलते-चलते

दमदमा स्थित ग्रामीण विकास के गलियारों में इन दिनों एक गीत बहुत सुनाई दे रहा है। जिसके बोल है… धूप में निकला ना करो रूप की रानी/ गोरा रंग काला ना पड जाये….। अब इस गाने को लेकर किसकी तरफ इशारा है… हमको कुछ नहीं पता। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

– प्रशांत अंजाना

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