सामाजिक समरसता यात्रा का उज्जैन में भव्य स्वागत

आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्रा

उज्जैन, अग्निपथ। देशव्यापी सामाजिक समरसता यात्रा रविवार को उज्जैन पहुंची। शहर में सभी वर्गों के नागरिकों ने इस यात्रा का भव्य स्वागत किया। यात्रा को एक रैली के रूप में शहर में प्रवेश कराया गया। विक्रम कीर्ति मंदिर में यात्रा लेकर आए समाजसेवियों का स्वागत-सम्मान किया गया।

सामाजिक समरसता के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर तीसरी राष्ट्रीय रथयात्रा रविवार को उज्जैन पहुंची।अ.भा. क्षत्रिय महासभा द्वारा सभी वर्गों के सहयोग व समर्थन से यह यात्रा जम्मू कश्मी?र से कन्याकुमारी तक निकाली जा रही है। यात्रा के उज्जैन पहुंचने पर रविवार दोपहर 12 बजे चामुंडा माता चौराहे से वाहन रैली निकाली गई, यह यात्रा विक्रम कीर्ति मंदिर पहुंचकर सामाजिक समरसता सम्मेलन में परिवर्तित हो गई।

राष्ट्रीय रथयात्रा लेकर पहुंचे क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय महामंत्री अनिलसिंह चंदेल, प्रदेश अध्यक्ष रामवीरसिंह सिकरवार, महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष डॉ अंजना राजावत, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एड्वोकेट ठाकुर हरदयाल सिंह, जिला अध्यक्ष द्रुपदसिंह पंवार के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों के प्रमुख जनों का सम्मान किया गया।

मांगो के पूरा होने पर समाज में सामाजिक समरसता को पुन: स्थापित हो सकती हैः चंदेल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अ.भा. क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री ठा. अनिलचिंह चंदेल ने कहा कि यह यात्रा तीन प्रमुख मांगों को लेकर निकाली जा रही है। इन मांगो के पूरा होने पर समाज में सामाजिक समरसता को पुन: स्थापित किया जा सकता है। सामाजिक समरसता यात्रा जम्मू कश्मीर से प्रारंभ हुई है और देश के सभी प्रदेशों से होते हुए कन्या कुमारी में समाप्त होगी। यात्रा प्रत्येक जगह अपनी सामाजिक समरसता की भावना से लोगों को प्रेरित करते हुए उन्हें अपने अभियान के पक्ष में समर्थन के लिए प्रेरित करेगी।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. महेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए सबसे पहले देश में से जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करना होगा। यहीं हमारी पहली मांग है।

दूसरी मांग है कि सामाजिक समरसता का माहौल बनाया जाए, वैमनस्यता समाप्त की जाये। तोमर ने कहा कि समरसता यात्रा के जरिए तीसरी मांग है कि देश की जिन महान विभूतियों ने देश को आजाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है उन्हें कुछ लोग जातिगत आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे हैं।  इन विभूतियों को जातिगत आधार पर नहीं बांटा जाये।

यात्रा की समाप्ति पर इन्हीं तीनों मांगों को लेकर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख लोगों को ज्ञापन देकर प्रमुखता से यह मांग उठाई जायेगी।

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