विक्रम के दस्तावेज चोर को कुलसचिव ने दबोचा

सामने आई अतिथि विद्वान की भूमिका, अब कार्यवाही की तैयारी

उज्जैन, अग्निपथ। विक्रम विश्वविद्यालय से लगातार संवेदनशील दस्तावेज चोरी होने की घटनाओं की पड़ताल में गुरूवार को अहम मोड़ आ गया है। कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी से इस मामले में सख्ती से पूछताछ की तो उसने कई सारे राज उगल दिए। पता चला है कि विवि के एक अतिथि विद्वान की इसमें अहम भूमिका रही है। उसी ने कर्मचारी के माध्यम से विवि के रिकार्ड से कई सारे दस्तावेज निकलवाए और इसके बाद एक छात्र संगठन को इन्हें सौंपा।

विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में हुए पीएचडी संबंधी गड़बड़ी, आवेदको की ओएमआर शीट की कॉपी वायरल होना और इसके बाद कार्यपरिषद सदस्य संजय नाहर के सर्टिफिकेट का वायरल होना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा था। विवि में यह साफ हो चुका था कि कोई घर का भेदी ही इन सब मामलों को छात्र संगठन के माध्यम से उछाल रहा है।

गुरूवार को इस मामले में शंका के आधार पर कुलसचिव डा. प्रशांत पुराणिक ने एक कर्मचारी को बुलाकर पूछताछ की। इस कर्मचारी ने न केवल सारे राज उगल दिए बल्कि विवि के एक अतिथि विद्वान के साथ हुई बातचीत का ऑडियों भी सुना दिया। ऑडियों में अतिथि विद्वान कर्मचारी को कई तरह के प्रलोभन देकर और भय दिखाकर उससे विवि के गोपनीय दस्तावेज निकालने का कह रहा है। कुलसचिव ने इस ऑडियों को भी अपने पास सुरक्षित रख लिया है।

गुरूवार को इस मामले में सुमन मानविकी भवन में हल्का हंगामा भी हुआ। अपने व्यक्तिगत दस्तावेज वायरल होने के मामले में विवि कार्यपरिषद सदस्य संजय नाहर ने भी विवि प्रशासन को शिकायत की है।

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