उलझन पर उलझन: टू लेन को फोरलेन बनाने में करोड़ों रुपए का पेच फंसा, मामला अधर में लटका

उज्जैन- जावरा रोड की कहानी

उन्हेल/नागदा, (संजय कुंडल) अग्निपथ। उज्जैन से जावरा सडक़ जल्द ही फोरलेन बनेगी क्यों यह सुनकर आपके कानों में झनझनाहट लंबे समय से हो रही है, और अब आपका दिमाग भी सुन्न होने वाला है क्योंकि इस मामले में उलझन पर उलझन है फोरलेन के लिए जब बात आगे बढ़ी तो, दिल्ली से भोपाल तक आई और कागजी दिक्कत होती तो, भोपाल की सरकार रास्ता निकाल लेती, पर उलझन तो नगद कि फस गई उसका हल नहीं निकल रहा है और यह नगद सरकार अदा करने के मूड में नहीं, उसके लिए टेंडर को हथियार बनाया गया पर यह कितना कारगर होता है यह अभी गर्भ में हैं!

हमारे सांसद अनिल फिरोजिया जब नागदा पहुंचे तो अग्निपथ के इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि उज्जैन जावरा टोल कंपनी का 69 करोड़ रुपिया बकाया चल रहा है उसके लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मामला संज्ञान में ले लिया और मध्य प्रदेश के अधिकारी भी पहुंचकर बैठक कर चुके हैं उसके लिए यह रास्ता बन रहा है कि जो बकाया राशि मध्यप्रदेश शासन को लाकर देगा और टेंडर डाल देता है तो उसे यह सडक़ हैंड ओवर कर दी जाएगी

इस पर काम चल रहा है और बहुत बड़ी सौगात हमें मिलेगी जिसमें जावरा से लेकर नागदा उन्हेल होकर इस सडक़ को पीथमपुर तक जोडऩे की योजना है उन्हेल में बाईपास कि अभी डीपीआर नहीं बनी है और फिर जो हमारे प्रतिनिधि जनप्रतिनिधि चाहेंगे उस पर काम किया जाएगा, यही बातें हमारे सांसद जी इस वीडियो में कह रहे हैं!

यह सुनकर वाकई में आपके कानों की झनझनाहट के बाद दिमाग तो सुन, हो गया होगा टूलेन ऐसे ही फोरलेन नहीं बन जाएगा आपके सुन,दिमाग को चलाने के लिए यह बताना जरूरी है कि जब भी उज्जैन से जावरा तक कोई बड़ा हादसा होता है तो एक ही ही जवाब सभी धर्म से घूम कर आता है जल्द ही फोरलेन बनेगा, आपको ध्यान होगा पहले इस सडक़ पर हादसे हुए तो, स्टॉपर को प्रशासन ने खड़े रहकर सभी जगह तुड़वा दिए, फिर हादसा हुआ तो घटनास्थल के आसपास पर एक की जगह थोड़ी दूर पर एक और सडक़ बना दी, और जब उन्हेल से नागदा के बीच स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत हुई तो, सडक़ छोटी बता कर नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर दी, यह सब हो हल्ला शांत करने का तरीका था!

क्योंकि जिसको सडक़ दे रखी वह खुद घाटे मैं वह तो सडक़ का रखरखाव कर ले वही बहुत है! सवाल के हाथ पैर नहीं होते हैं पर वह खड़ा हो जाता है की ऐसा कौन ठेकेदार होगा जो पहले करोड़ों रुपया देगा फिर सडक़ का मालिक बनेगा, उसके बाद सडक़ का निर्माण करें पर हमारे भाग्य उज्जवल हुए तो यह चमत्कार भी हो सकता है।

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