मांडव उत्सव आयोजन में कथित अनियमितता की होगी जांच

धार में पर्यटन मंत्री ठाकुर ने किया वादा, बगैर टेंडर कंपनी को दे दिया ठेका

धार, अग्निपथ। सुर्खियों में रहने वाले मांडू उत्सव में हुए टेंडर घोटाले में पर्यटक मंत्री उषा ठाकुर ने जांच के आदेश दे दिए है और जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई का वादा किया है। दरअसल पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर रविवार को धार के ऑडिटोरियम में नर्मदा साहित्य मंथन भोज पर्व के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई थी। इसी दौरान मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि मैं मांडव उत्सव में गई थी तो काफी शिकायतें मिली थी। इन सभी शिकायतों के जांच के आदेश दिए। जांच में जो भी दोषी होगा उस पर हम कार्रवाई करेंगे।

पांच दिवसीय मांडू उत्सव भले ही समाप्त हो गया हो किंतु इवेंट कंपनी से जुड़े विवाद समाप्त नहीं हो रहे है। मांडू उत्सव का आयोजन उस कंपनी ने करवाया जिसको उसे करने के लिए ऑर्डर नहीं दिया गया था। 22 जनवरी तक भी उक्त टेंडर आनलाइन प्रक्रिया में पूर्ण नहीं बताया जा रहा है।

सरकार और विभाग इस इवेंट कंपनी पर कितनी मेहरबान है कि जो ऑनलाइन टेंडर हुए ये उसकी प्रकिया बगैर पूर्ण किए कंपनी को काम करने दिया गया। म.प्र. पर्यटन जारी बोर्ड द्वारा मांडव उत्सव के लिए 6 दिसम्बर को ऑनलाईन टेंडर जारी किया था जिसकी 15 दिसम्बर को अंतिम तारीख निधारित की गई थी दो कंपनियो ने इस टेंडर में भाग लिया- ई फेक्टर और लल्लू जी एंड संस। दोनों ने टेंडर भरा था किंतु शर्तों के आधार पर बड़ी चतुराई से विभाग के आला अधिकारियो ने ई फेक्टर को लाभ पहुचाने के नियत से 50 प्रतिशत अंक प्रेजेंटेशन के लिए निर्धारित किए गए। जिसमे यह अंक अधिकारियो द्वारा अपनी चहेती ई फेक्टर इवेंट कंपनी को दिए।

मंत्री को भी किया गुमराह

इन अधिकरियो के मंसूबे कितने मजबूत है कि विभाग की मंत्री उषा ठाकुर को भी गुमराह करने से नहीं हिचके, उन्हें भी विभाग के इस काले पीले की खबर नहीं लगने दी। जब उद्घाटन करने मंत्री आई तो वहां के लोगो ने कंपनी की हठधर्मिता और मांडू उत्सव की सार्थकता पर सवाल उठाए थे। जिसपर मंत्री ने यहा तक पत्रकारों से चर्चा मे कहा था कि मैने इवेंट कंपनी को डाट पिलाई है और वो यहा तक बोल गई थी कि छ: दिन पहले ही कंपनी को आर्डर मिला इस लिए परेशानी आ रही है।

अगली बार हम टेंडर प्रक्रिया छ: महीने पहले कर देंगे। लेकिन मंत्री को यह भी नहीं मालुम है कि टेंडर प्रक्रिया ही पुरी नही अपनाई गई और विभाग ने अपनी चहेती कंपनी को काम दे दिया। खास बता यह है कि 7 जनवरी को मंत्री ने कहा कि छ: दिन पहले ही ऑर्डर दिया यानी कि 1 जनवरी को ऑर्डर कंपनी को मिलना था लेकिन इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा की कंपनी को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी ऑर्डर नहीं देकर कार्य करवाकर आर्थिक लाभ से नवाज दिया गया।

70 फीसदी एडवांस…!

पहली बार सरकारी टेंडर में देखने में आया है कि कोई सरकारी विभाग किसी कंपनी को 70 प्रतिशत राशि कार्य के पहले एडवांस देने का प्रावधान किया। ताकि चहेती इवेंट कंपनी को कार्य पूर्ण करने के पहले ही बड़ा अमाउंट मिल जाए। यह अनोखी शर्त म.प्र. पर्यटन निगम ने रखने का दुसाहस किया अन्यथा कभी भी शासकीय स्तर पर ऐसी अनोखी शर्त नहीं रखी जाती। मांडू उत्सव का टेंडर भी कम विवादित नही रहा। मांडू उत्सव के खत्म होने के बाद तक सिर्फ ऑनलाइन टेंडर की तकनीकि बीड ही खोली गई। जबकि वित्तिय बीड नहीं खोली गई तो यह माना जाता है कि टेंडर कि प्रकिया पूर्ण नही हुई है।

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