कृषि उपज मंडी में फिर पुलिस चौकी खुली, जवान तैनात

व्यापारी से लूट के आरोपियों का नहीं लगा सुराग, माल नहीें हुआ बरामद

उज्जैन, अग्रिपथ। कृषि उपज मंडी में कलेक्टर के निर्देश के बाद सोमवार से पुलिस चौकी खुल गई है। यहां एक चार का गार्ड तैनात कर दिया गया है। हेड कांस्टेबल अरुण के साथ चार सैनिक भी यहां तैनात हो गए हैं। किसान सहायता केंद्र के पास स्थित हम्माल तुलवाटी कक्ष में से एक कमरा पुलिस चौकी के लिए दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि कृषि उपज मंडी में एक अक्टूबर को पशु आहार की दुकान चलाने वाले रुपेश कुमार की दुकान पर चार महिलाएं पहुंची और साफ सफाई के नाम पर व्यापारी के गल्ले से चार लाख रुपए उड़ा दिए थे। हालांकि महिलाओं को तत्काल ही पकड़ लिया गया था। परन्तु उनके पास से रुपए नहीं मिले थे।

अभी तक महिलाओं से पैसों की बरामदगी नहीं हो पाई है। इससे व्यापारियों में रोष बढ़ गया था। इसके बाद मंडी में सोयाबीन का सीजन आने की वजह से व्यापारियों द्वारा पुलिस चौकी खोलने की मांग की जा रही थी।

तीन दिन पहले कलेक्टर आशीष सिंह मंडी में पहुंचे थे। यहां व्यापारियों और मंडी के अधिकारियों से चर्चा की थी। इस दौरान व्यापारियों ने उनसे मंडी में पुलिस चौकी खोलने और व्यवस्था को बनाने की मांग की थी। कलेक्टर सिंह ने तत्काल ही एसपी सतेंद्र शुक्ल से बात करके एक चार का गार्ड तैनात करने के निर्देश दिए थे। इस पर एसपी ने सहमति दे दी थी।

23 हजार 500 से ज्यादा बोरियों की आवक

सोमवार को कृषि उपज मंडी में 23557 बोरियों की आवक हुई। इसमें लोकवन की 3561 बोरियां अधिकतम 2411 के दाम पर बिकी। पूर्णा की 227 बोरियां 2199 के अधिकतम और पोषक गेहूं की 198 बोरियां 2320 के अधिकतम दाम पर बिकी। सोयाबीन की 18511 बोरियां अधिकतम 5750 के दाम पर बिकी। आवक इससे ज्यादा आने की संभावना थी, परन्तु बारिश की वजह से किसानों ने माल को रोक लिया। इसलिए आज सोयाबीन करीब 100 रुपए ज्यादा भाव में बिका। देशी चना की 32 बोरियां अधिकतम 5051, चना काबली 444 अधिकतम 9000, चना शंकर 476 अधिकतम 5400,मक्का की दो बोरियां अधिकतम 1275, उड़द की 56 बोरियां अधिकतम 5610, मैथीदाना की छह बोरियां अधिकतम 5510 के दाम में बिकी।

रेट नहीं मिलने पर किसान सौदा कैंसिल कर रहे

मंडी में किसानों को उनकी उपज के दाम नहीं मिलने पर वे सौदा कैंसिल कर देते हैं। यह सिलसिला पिछले एक माह से चल रहा है। कई किसान अपनी उपज का नीलामी में दाम नहीं मिलने पर तत्काल ही सौदा कैंसिल करवा देते हैं। इससे व्यापारी भी दवाब में आ जाते हैं। अच्छी उपज का अच्छा रेट मिलने पर किसान उपज को बेचते हैं अन्यथा वापस ले जाते हैं।

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