फीस वसूली में राहत नहीं:निजी स्कूलों को आपदा प्रबंधन के तहत फीस लेने का आदेश दिया है तो क्यों न उनके नुकसान की भरपाई भी राज्य सरकार करे: सुप्रीम कोर्ट

जयपुर। प्रदेश के निजी स्कूलों में फीस काे लेकर अभिभावकों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोनाकाल में शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए निजी स्कूलों की फीस वसूली मामले में सोमवार को कहा है कि यदि निजी स्कूलों को आपदा प्रबंधन के तहत फीस लेने के आदेश दिए हैं तो क्यों न उनके नुकसान की भरपाई भी राज्य सरकार ही करे।

यह भी कहा कि सरकार ने निजी स्कूलाें के लिए जो भी आदेश जारी किए हैं, उनमें कहीं पर भी आपदा प्रबंधन एक्ट का हवाला नहीं दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी सोमवार को मैनेजिंग कमेटी सवाई मानसिंह विद्यालय, गांधी सेवा सदन, सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस सहित फी-रैग्युलेशन एक्ट-2016 को चुनौती देने वाली भारतीय विद्या भवन सोसायटी की एसएलपी पर संयुक्त सुनवाई करते हुए दिया।

कोर्ट ने कहा- सरकार के आदेश में कहीं भी आपदा प्रबंधन एक्ट का जिक्र नहीं

सुनवाई के दौरान निजी स्कूल संस्थानोंं की ओर से सीनियर एडवोकेट पल्लव सिसोदिया ने कहा कि हाईकोर्ट ने आपदा प्रबंधन का हवाला देते हुए राज्य सरकार की सिफारिशों के अनुसार निजी स्कूलों को फीस वसूल करने की छूट दी है। लेकिन राज्य सरकार ने निजी स्कूलों के लिए जो भी आदेश दिए हैं, उनमें कहीं पर भी आपदा प्रबंधन एक्ट का हवाला नहीं दिया है।

निजी स्कूलों की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार ने ऐसा किया है तो क्यों न वही निजी स्कूलों के नुकसान की भरपाई करे। इस मामले में करीब दो घंटे सुनवाई होने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखी है। निजी स्कूल संस्थानों की ओर से कहा कि जब अनिवार्य शिक्षा का कानून-2009 लागू है तो फिर राज्य सरकार को फीस एक्ट 2016 व 2017 लाने की क्या जरूरत थी।

गौरतलब है कि एसएलपी में निजी स्कूल संस्थानों ने राजस्थान हाईकोर्ट के 18 दिसंबर 2020 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें निजी स्कूल संचालकों को राज्य सरकार के 28 अक्टूबर के आदेश की सिफारिशों के अनुसार फीस वसूल करने की छूट देते हुए राज्य सरकार के फीस तय करने के निर्णय में दखल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों को कोरोनाकाल के दौरान 100% फीस लेने के आदेश दिए थे।

अभिभावकों को 5 मार्च से 6 माह के भीतर चुकानी हाेगी सारी फीस
पिछली सुनवाई पर सर्वोच्च अदालत ने कोरोनाकाल के 2020-21 के शैक्षणिक सत्र की वही स्कूल फीस तय की थी जो शैक्षणिक सत्र 2019-20 में थी। साथ ही अभिभावकों को स्कूल फीस का भुगतान 5 मार्च से छह महीने की किस्त में देने के लिए कहा था। वहीं राज्य सरकार को भी स्कूलों के आरटीई एडमिशन की बकाया राशि एक महीने में देने के लिए कहा था।

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