उज्जैन में भी रेमडेसिविर की कालाबाजारी

देशमुख हॉस्पिटल के कर्मचारी मरीजों के इंजेक्शन चुराकर बेच रहे थे 61 हजार में, आरडी गार्डी कॉलेज के भी तीन लोग शामिल, आठों आरोपियों पर रासुका में कार्रवाई

उज्जैन, अग्निपथ। कोरोना पीडि़तों के परिजनों से मंगाए रेमडेसिविर इंजेक्शन देशमुख हॉस्पिटल के कर्मचारी चुराकर बाजार में बेच रहे थे। उनके साथ आरडीगार्डी मेडिकल कॉलेज के तीन कर्मचारी व दो अन्य लोग भी शामिल थे। रविवार को पुलिस ने पूरे गिरोह को दबोचकर पांच इंजेक्शन जब्त किए है।

सर्वविदित है कोरोना संक्रमितों को लगाया जाना वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन बमुश्किल ब्लैक में मिल रहे हैं। रविवार को पुलिस ने आगर रोड स्थित एलांस सिटी के सामने लोकेश पिता श्यामलाल आंजना निवासी ग्राम बटवडी शाजापुर, प्रियेश पिता विनोद चौहान निवासी मसीह कंपाउंड, देवासरोड और एलांस सिटी के भानुप्रताप पिता रघुवीरसिंह राजपूत को महंगे दाम में इंजेक्शन बेचने का प्रयास करते हुए पकडक़र एक इंजेक्शन बरामद किया।

उन्होंने हरिओम पिता शांतिलाल आंजना व महिदपुर रोड हाल मुकाम एलांस सिटी के वैभव पिता विजय पांचाल से इंजेक्शन खरीदना बताया। दोनों को दबोचकर उनसे भी एक रेमडेसिविर व एक एंटीबॉयोटिक जब्त कर पूछताछ की। पता चला वेदनगर तिराहे स्थित देशमुख हॉस्पिटल के कर्मचारी देवास स्थित टोंकखुर्द हाल मुकाम नानाखेड़ा क्षेत्र निवासी सरफराज पिता शहीद शाह, उन्हेल के पिपलोदा हाल मुकाम एलांस सिटी का कुलदीप पिता सुनील चौहान व नागझिरी निवासी राजेश पिता जयराम नरवरिया ने उन्हें इंजेक्शन दिए। पकड़ाते ही तीनों ने बताया कि भर्ती मरीजों को लगाने की जगह इंजेक्शन चुराकर बेच देते है।

प्रदेश में पहली बार रासुका

रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वालों पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रासूका के निर्देश दिए थे। कलेक्टर आशीषसिंह व एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल ने भी ब्लैकमलरों कार्रवाई के लिए टीम गठित की थी। इत्तेफाक है कि आदेश के बाद पहला मामला उज्जैन में सामने आया। पुलिस ने गिरोह पर धारा 188, 420,120 बी, 24 मप्र आर्युविज्ञान, 5/13 मप्र ड्रग्स एक्ट, 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम में केस दर्ज करने के साथ रासुका की कार्रवाई कर दी।

ऐसे फंसे पुलिस के जाल में

सूत्रों के अनुसार रेमडेसिविर ब्लैक में बेचने का पता चलते ही पुलिस ने पकडऩे की योजना बनाई। इसके चलते पुलिसकर्मी ग्राहक बनकर गए। एलांस सिटी के सामने लोकेश से मिले। 61 हजार रुपए में सौदा तय होने के बाद पुलिस ने इंजेक्शन मंगवाया। एक्टिवा से इंजेक्शन लाते ही पुलिस ने लोकेश के साथ ही प्रियेश व भानू को भी दबोच लिया। आरोपियों से तीन रेमडेसिविर, दो मेरेफिनम एंटी बायोटिक इंजेक्शन व एक्टिवा बरामद की है।

इनकी रही भूमिका

एएसपी अमरेंद्रसिंह ने बताया कि गिरोह को पकडऩे में सीएसपी अश्विन नेगी, टीआई अजीत तिवारी, एसआई रविंद्र कटारे, यादवेंद्र सिंह परिहार, साइबर सेल प्रभारी विक्रमसिंह चौहान, प्रधान आरक्षक सोमेंद्र दुबे, प्रवीण चौहान, कन्हैया शर्मा, आरक्षक दिनेशसिंह, शैलेष योगी, श्यामवरणसिंह कुलदीप, जितेंद्र पाटीदार, निकिता रावत व सैनिक सुनील ठाकुर की सराहनीय भूमिका रही है।

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