हम चुप रहेंगे (9 मई 2022)

सेवक …

राजनीति में कार्यकर्ता, तभी तक सेवक की भूमिका में रहता है। जब तक उसे पद नहीं मिल जाता। पद के बाद सेवक को चाहिए कि वह खुद अपनी भूमिका बदले। खासकर चरणों में बैठने की आदत से बाज आये। मगर ग्रामीण युवा इकाई के जलवा नेता जी, आज भी सेवक की भूमिका में है।

बुधवार की रात 10 बजे की आंखो देखी है। अपने वजनदार जी पलंग पर विराजमान थे। लेटरबाज जी सोफे पर बैठे थे। बाकी 2 पदाधिकारी भी सोफे पर विराजमान थे। लेकिन जलवा सेवक नीचे बैठे थे। फर्श पर। देखकर आश्चर्य हुआ। दु:खद भी लगा। जब वरिष्ठ ही अपने पदाधिकारी को सम्मान नहीं देंगे, तो बाकी की टीम क्या सम्मान करेंगी। ताज्जुब की बात यह है कि अपने जलवा सेवक ही फर्श पर बैठकर खुश है। तो हम कौन होते है। सम्मान की बात उठाने वाले। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

सबको बना दूं…

कमलप्रेमियों की युवा नगर इकाई की घोषणा होना है। जो कि जल्दी ही होगी। इस बीच युवा अध्यक्ष दबाव से गुजर रहे है। उत्तर और दक्षिण का प्रेशर है। यह घटना उत्तर से जुड़ी है। अपने पहलवान के पास कोई दावेदार पहुंचा। डिमांड रखी, मुझे मोर्चे में जगह दिलवा दो। अपने पहलवान ने दावेदार से ही अध्यक्ष को फोन करवा दिया। मगर फोन स्पीकर पर था। दावेदार ने अपनी बात रखी। उधर से जवाब मिला। 15-16 नाम दे चुके है पहलवान। सभी को बना दूं क्या? पहलवान ने यह सुन लिया। फोन बंद करवा दिया। इधर युवा अध्यक्ष को भी पता चल गया। पहलवान ने सुन लिया है। अब पहलवान नाराज है और युवा अध्यक्ष परेशान। देखना यह है कि युवा अध्यक्ष अब नाराजगी दूर करने के लिए क्या कदम उठाते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

आमने-सामने …

अपने विकास पुरूष और पिपली राजकुमार सार्वजनिक स्थानों पर एक-दूसरे से बचते है। आमने-सामने संवाद का कोई मौका नहीं आने देते है। मगर बाबा के दरबार में आमने-सामने हो गये। जिनके बीच में थे अपने मौनी बाबा- 3। वहीं मौनी बाबा, जो सिंहस्थ 2016 के प्रभारी थे। दर्शन के लिए आये थे। मंदिर में पिपली राजकुमार ने सिंहस्थ क्षेत्र से कालोनियों को मुक्त करने की बात रखी। नदी के आसपास 300 मीटर का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया। यह सब विकास पुरूष सुन रहे थे। उन्होंने भी मौनी बाबा-3 से कहा। यह बात वह कह रहे है, जिन्होंने सिंहस्थ क्षेत्र में कालोनियां कटवाई। विकास पुरूष और पिपली राजकुमार की बात सुनकर, अपने मौनी बाबा-3 अपनी आदत के अनुसार, सबकुछ सुनकर चुप रहे। तो हमको भी चुप रहने का अधिकार है। इसलिए आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

चुगलीराम जी…

शीर्षक पढक़र हमारे पाठक समझ गये होंगे। जरूर नामकरण हुआ है। मगर किसका- इसका खुलासा आगे पढऩे पर होगा। पहले यह बता दे कि यह नाम बाबा के दरबार में ज्यादा सुनाई दे रहा है। इशारा अपने फूलपेंटधारी की तरफ है। जिनको अब मंदिर के गलियारों में, उनको देखकर, उन्हीं के मातहत यह बोलते है। तो हमारे पाठक समझ गये होंगे। अब बात करते है। अपने चुगलीराम जी की एक इच्छा की। जिसको लेकर एक फाइल चलाई है। जिसमें चुगलीराम जी ने, कोठी से आने वाले संदेशों पर आपत्ति उठाई है। सीधी भाषा में बोले तो … उनकी इच्छा है कि जो भी वीआईपी आये, उसकी सूचना सीधे पहले उनकी दी जाये। उसके बाद फैसला होगा। कौन किस योग्य है। देखना यह है कि अपने चुगलीराम जी की इस इच्छा पर मोहर कब लगती है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

ऋणी …

तो अपने लेटरबाज जी ने आखिरकार अपना ऋण उतार दिया। युवा इकाई में पद दिलवाकर। लंबे समय से उन पर यह कर्जा था। उनके एक अनन्य भक्त ने विज्ञापन छपवाये थे। तब यह तय हुआ था कि इसके बदले कोई अच्छा पद दिया जायेगा। आखिरकार समय आ गया। अपने भक्त को उन्होंने महामंत्री बनवा दिया।

यह भक्त इसके पहले कभी किसी पद पर नहीं रहा। दाल-बिस्किट वाली तहसील में तो यही चर्चा है। इसके अलावा एक पोस्ट भी सोशल मीडिया पर अपलोड हुई है। जिसमें सीधे-सीधे युवा मोर्चे का सट्टे की लाइन पर चलने का उल्लेख है। एक चर्चा यह भी है कि जिन्होंने आजीवन निधि में 50-50 हजारी का सहयोग दिया। उनको भी पद दिया गया है। तभी तो युवा कमलप्रेमी बोल रहे है। राशि दो और पद लो। कमलप्रेमी मुख्यालय के भरोसेमंद सूत्र भी इसकी पुष्टि कर रहे है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

ऐसा भी होता है…

कमलप्रेमी संस्था में एक नियम है। कोई भी सूची जारी करने से पहले बैठक करते है। विचार-विमर्श होता है। फिर सूची जारी होती है। जिसका सीधा अर्थ यह होता है। अब सूची में किसी कार्यकर्ता का नाम नहीं जुड़ेगा। मगर इस बार उल्टा हो गया। सूची जारी हो गई। जिसमें एक नेत्री का नाम नहीं था। जिसके लिए अपने दिल्ली वाले नेताजी लगातार कोशिश कर रहे थे। सूची देखकर भडक़ गये। उन्होंने पहले अपने ढीला-मानुष को फोन लगाया। फिर मोर्चे के मुखिया को। दोनों को हडका दिया। नतीजा कमलप्रेमी नेत्री को बाद में मंत्री बना दिया गया। अब कमलप्रेमी बोल रहे है। ऐसा भी होता है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।

शिकायत …

अभी तक अपने पपेट जी की शिकायत, उनके मातहत ही करते थे। लेकिन खुलकर नहीं। दबी जुबान से पपेट जी के व्यवहार की चर्चा होती थी। अब पहली बार सत्तादल से जुड़े कमलप्रेमी खुलकर सामने आये है। मौका था मास्टर प्लान को लेकर ज्ञापन देने का। जिसमें सभी पूर्व नगर सेवक शामिल थे। अपने वजनदार जी और पहलवान से मिलने गये थे। पहले ज्ञापन दिया।

फिर अपने पपेट जी के व्यवहार और सम्मान नहीं करने की शिकायत भी कर डाली। वजनदार और पहलवान ने सुनकर आपत्ति ली। ऊपर तक शिकायत पहुंचाने का आश्वासन दिया है। देखना यह है कि ठेकेदारों के बाद कमलप्रेमियों की शिकायत का क्या असर, अपने पपेट जी पर होता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

पलटी …

वर्दी की धौंस दिखाकर, दुष्कर्म का एक मामला याद होगा। जिसमें एक वर्दीधारी पर गंभीर आरोप लगाये गये थे। प्रकरण भी दर्ज हुआ था। आरोपी वर्दीधारी को जमानत करवानी पड़ी। इस मामले में नया मोड आ गया है। जिस महिला ने आरोप लगाया था। उसने अब पलटी मार दी है। आरोपी को अब पारिवारिक मित्र बता रही है। उल्टे अपने पति पर आरोप लगा रही है। जिनके दबाव में प्रकरण दर्ज करवाया था। वर्दी पर भी आरोप लगा रही है। बगैर एफआईआर पढ़वाए, दस्तखत करवा लिये थे। ऐसा एक वीडियो वायरल हुआ है। मगर हमको तो अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

चलते-चलते …

स्मार्ट भवन के गलियारों में शनिवार की शाम यह पंक्तियां सुनाई दी। जिसमें किसी की तारीफ में यह बोला जा रहा है कि … बिखरी हुई जुल्फो का नजारा करेंगे लोग/ लम्हें यूं ही प्यार के गुजारा करेंगे लोग/ चेहरे को मत छुपाओ यूं ही देखती रहो/ अब तुमको चांद कहके पुकारा करेंगे लोग… । यह गजल किसके लिए बोली जा रही है। इसको लेकर सभी चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

– प्रशांत अंजाना

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