ओह माय गॉड- 2:  मात्र 51 हजार खर्च करके, लाखों का मुनाफा..!

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फिल्म पर्यटन नीति की धज्जियां उड़ी

उज्जैन, अग्निपथ। मप्र फिल्म पर्यटन नीति 2020 में स्पष्ट निर्देश है। अगर किसी फिल्म की शूटिंग में व्यवस्था के लिए पुलिस बल लगता है। तो आवेदनकर्ता को दैनिक दर के आधार पर भुगतान करना जरूरी है। यह राशि शासकीय खजाने में ही जमा होती है। मगर, ताज्जुब की बात यह है कि … 8-8 घंटे की शिफ्ट में 10-10 का पुलिस बल लगा रहा। लेकिन 1 रूपया भी फिल्म पर्यटन नीति के अनुसार नहीं चुकाया गया।

ओह माय गाड-2 … फिल्म शूटिंग के लिए प्रशासन और पुलिस ने जो अतुलनीय और अकल्पनीय सेवाएं दी है। इसका फिल्म रिलीज होने के बाद क्या परिणाम होगा ? विवाद होंगे या र्निविवाद रहेंगी फिल्म? फैसला तो बाबा महाकाल ही करेंगे। मगर जिस तरीके से मप्र फिल्म पर्यटन नीति 2020 की धज्जियां उड़ी है। उस पर जरूर आज की तारीख में सवाल खड़े हो रहे है। चर्चा है कि मात्र 51 हजार खर्च करके, फिल्म निर्माता लाखों का मुनाफा कमायेंगा।

कुछ नहीं लिया …

सहज- सरल पुलिस अधीक्षक सत्येन्द्र शुक्ला से जब यह सवाल किया गया कि … ओह माय गाड के लिए, जब-जब पुलिस ने सहयोग किया। उसके बदले में, क्या प्रोडेक्शन हाउस ने, निर्धारित दर से कोई भुगतान किया है। तो उनका जवाब था कि … कुछ नहीं लिया गया है। जबकि मप्र फिल्म पर्यटन नीति के नियमानुसार पुलिस सहयोग के लिए भुगतान किया जाना चाहिये।

नियम

पुलिस (गृह) विभाग द्वारा जारी फिल्म शूटिंग की दर के अनुसार नियम यही कहता है कि … भुगतान जरूरी है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (योजना) द्वारा अनुमोदित दर निम्नानुसार है। जिसमें निरीक्षक 3780 रूपये, उपनिरीक्षक 3180, सहायक उपनिरीक्षक 3070, प्रधान आरक्षक 2100 और आरक्षक के लिए 2 हजार की दर निर्धारित है। जो कि 8 घंटे के हिसाब से 14 हजार 130 रूपये बनती है। यह दर प्रति पुलिसकर्मी है।

10 का बल

पुलिस मुख्यालय उज्जैन के भरोसेमंद सूत्रों पर अगर यकीन किया जाये। तो जिस-जिस थाना क्षेत्र में शूटिंग हुई है। उस थाना क्षेत्र का बल लगाया गया है। जो कि कम से कम 10 पुलिसकर्मियों का बल था। जिसमें 2 सहायक उपनिरीक्षक, 2 प्रधान आरक्षक और 6 आरक्षक लगाये गये थे। इन सभी ने अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से अंजाम दिया।

फिल्म की शूटिंग क्षिप्रा तट- महाकाल मंदिर- टावर चौक- रेलवे स्टेशन- सिंधिया धर्मशाला और उज्जैन- इंदौर हाईवे पर हुई है। 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक शूटिंग हुई है। 10 के बल का, एक शिफ्ट का दर, नियमानुसार 22340 बनता है। इसके अलावा स्टार अक्षय कुमार के आगमन पर तो थाना- लाइन और अतिरिक्त बल भी लगाया गया था।

मगर स्टार के आगमन पर कानून व्यवस्था बिगडऩे का डर मानकर, अगर इस दिन को छोड़ दिया जाये। तो भी पर्यटन फिल्म नीति के अनुसार राशि वसूल की जानी थी। मगर नियमों की धज्जियां उड़ा दी गई।

रंग चोखा

हींग लगे ना फिटकरी… और रंग चोखा। इस कहावत से वकाऊ फिल्म वाले खूब वाकिफ है। तभी तो उन्होंने ऑनलाइन अनुमति में सहायता के लिए पुलिस बल मांगा ही नहीं। क्योंकि फिल्म पर्यटन नीति के नियम पता चल गये थे। सूत्रों का कहना है कि …. पहले पुलिस बल मांगा था। लेकिन नियम में भुगतान की दर देखकर, तत्काल पाला बदल लिया।

संभवत: उच्च पदस्थ अधिकारियों से आश्वासन मिल गया होगा। पुलिस बल उपलब्ध हो जायेंगा। तभी तो हींग लगे ना फिटकरी- रंग चोखा की तर्ज पर काम हो गया। वह भी केवल 51 हजार की राशि देकर। महाकाल प्रबंध समिति को। जबकि महाकाल मंदिर में चर्चा है कि … मंदिर में शूटिंग की अनुमति के लिए किराया प्रति घंटे की दर से लिया जाता है।

पिक्चर अभी बाकी है …

शहर की आम जनता अगर सोच रही है कि … ओह माय गाड की शूटिंग खत्म हो गई है। तो उसकी सोच गलत है। अभी शूटिंग ( पिक्चर) बाकी है। आगामी 1 नवम्बर से सतीगेट और टावर चौक स्थित मप्र सहकारी विपणन संघ कार्यालय में शूटिंग होगी। इसके बाद आगामी 6 नवम्बर को उज्जैन की सडक़ों और 7 नवम्बर को शहर के 1 पुलिस स्टेशन पर शूटिंग होगी।

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